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लापरवाही पड़ी भारी! भारतीय रेल ने 6 अधिकारियों को समय से पहले कर दिया रिटायर, सिस्टम में मचा हड़कंप

 Written By: Anamika Gaur Edited By: Shivendra Singh
 Published : Mar 20, 2026 08:51 am IST,  Updated : Mar 20, 2026 08:55 am IST

भारतीय रेल ने अपने सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। खराब प्रदर्शन और लापरवाही के आरोपों के बीच रेलवे ने 6 अधिकारियों को समय से पहले अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है। इस कार्रवाई के बाद रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया है।

रेलवे ने 6 अधिकारियों...- India TV Hindi
रेलवे ने 6 अधिकारियों को कर दिया रिटायर (सांकेतिक फोटो) Image Source : CANVA

भारतीय रेलवे में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक बड़ी चेतावनी सामने आई है। काम नहीं तो नौकरी नहीं के सख्त संदेश के साथ रेल मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 6 वरिष्ठ अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दे दी है। यानी इन अधिकारियों को उनकी सेवा अवधि पूरी होने से पहले ही घर भेज दिया गया है। रेलवे की इस कदम ने विभाग के हड़कंप हड़कंप मचा दिया है। यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि अब रेलवे के तंत्र में सुस्ती, अक्षमता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के लिए कोई जगह नहीं है।

भारतीय रेल ने यह कड़ी कार्रवाई भारतीय रेल स्थापना संहिता (IREC) के नियम 1802(क) के तहत की है। यह नियम प्रशासन को यह विशेष अधिकार देता है कि वह जनहित को ध्यान में रखते हुए किसी भी ऐसे अधिकारी को समय से पहले रिटायर कर सकता है, जिसका प्रदर्शन मानक के अनुरूप नहीं है। सरल शब्दों में कहें तो, अगर कोई अधिकारी सरकारी कामकाज में बाधा बन रहा है या उसकी काम करने की क्षमता खत्म हो गई है, तो सरकार उसे पेंशन देकर रिटायर कर सकती है।

किन अधिकारियों पर गिरी गाज?

रिटायर किए गए इन 6 अधिकारियों में कई बड़े पदों पर तैनात अफसर शामिल हैं। इनमें उत्तर रेलवे के मुख्यालय में तैनात CME (प्रोजेक्ट), दक्षिण पश्चिम रेलवे के NF-HAG अधिकारी, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के SAG अधिकारी, और पूर्वी रेलवे के IRSSE अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा रेलवे बोर्ड सचिवालय सेवा (RBSS) के अंडर सेक्रेटरी/डिप्टी डायरेक्टर और PPS स्तर के अधिकारियों को भी बाहर का रास्ता दिखाया गया है।

जीरो टॉलरेंस

रेलवे के इस कदम का मुख्य उद्देश्य जवाबदेही तय करना और परिचालन दक्षता को बढ़ाना है। रेल मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़ी इस विशाल संस्था में अक्षम लोग को ढोने की परंपरा अब खत्म हो रही है। यह कार्रवाई उन सभी के लिए एक कड़ा सबक है जो सरकारी नौकरी को केवल सुरक्षित ठिकाना मानकर अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह रहते हैं। रेलवे प्रशासन ने अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को फिर से दोहराया है, जिसका अर्थ है कि सेवा मानकों को पूरा न करने वालों पर कभी भी कार्रवाई हो सकती है।

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